• aditya shridhar

Updated: Jul 8, 2019


Located in Chamoli Garhwal , the Valley of flowers is a little piece of heaven on earth. With sodden beauty of the snow capped Himalayas , the sweet song of the pushpawati river, the whisper of the wind , the sound of the leaves dancing to it, the lush green meadows blending with the floating white clouds and a variety of flowers blooming in the valley like colours splashed on a canvas painted a picture of the most beautiful dream I have ever seen, the most magical place I could ever imagine and the most peaceful I have ever felt

I remember sitting on the computer in my city apartment reading about this magical place with more than 500 species of flowers , the majestic Himalayas in the back-drop and saying to myself ‘I wish I could be there!’ one could say it became a dream of mine to visit this magical land. my mother always says we have the ability to manifest our dreams but little did I know this beautiful dream of mine will be manifested into a piece of land. But this was not it ,because sometimes we acquire more than we desire, I visited hemkund and saw the bhyundar valley in all its glory with sun on my face and snow under my feet, the clouds came down to envelope the cold mountains with a warm hug and light danced on the waters of the hemkund glacier , it was almost surreal. I never could have imagined a place this magical and now when I sit on the computer in my city apartment I don’t read ,I write about a magical place with 500 species of flowers.

IIT Delhi में कल ६ April (शनिवार) को टीम ट्रैन्स्फ़ॉर्मिंग उत्तराखंड education ग्रूप ने दिल्ली में रह रहे युवाओं को एकत्र करके mentorship programme का orientation दिया.जिसका मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के गाँवो में पढ़ाई कर रहे युवकों को मेंटोरशिप programme के तहत कैसे mentoring दी जाय,


कैसे पूरे उत्तराखंड के हर बच्चे को एक मेंटॉर मिले जो उसे एक दोस्त की तरह guide करे, motivate करे, inspire करे और उसके साथ हमेशा खड़ा रहे...


कीर्ति डाँगवाल, भुवन चतुर्वेदी और देव भंडारी के नेतृत्व में यह programme IIT-Delhi में किया गया. जहाँ mentors को programme की सूचना ke साथ पहाड़ में गाँव में जाकर कैसे पूरा event organise होगा उसकी भी information दी गयी..


अब यह मेंटॉर को training दी जाएगी और उसके baad इन्हें Mentee assign किए जायेंगे.


इस तरह team transforming uttarakhand education अपने नए सत्र आग़ाज़ करने के लिए तय्यार है.


अगर आप हमारी इस मुहिम से जुड़ना चाहते है या कुछ सुझाव /प्रश्न है तो सम्पर्क करे


कीर्ति डाँगवाल:+91 88000 91412

भुवन चतुर्वेदी:+91 78385 32846

देव भंडारी:91-8080007600


हार्दिक धन्यवाद


Team transforming uttarakhand education


Pipalkoti Diary- 25- पीपलकोटी डायरी-25-  कोदा मंडुवा का सीजन आ गया है . अब पीपलकोटी में फिर से इनके बिस्कुट बनने शुरू हो जायेंगे .हैस्को - HESCO द्वारा संस्था की सदस्य श्रीमती भुवना पंवार को प्रशिक्षित किया गया गया है .

Manduwa/RAAGI- के बारे में जानकारी -  मिलेट, कोदा, मंडुवा, रागी, मारवा, मंडल नाचनी, मांडिया, नागली आदि। भारत मे मंडुवे की मुख्य रूप से 2 प्रजातियां पायी जाती है जिसे Eleusine indica जंगली तथा Eleusine coracana प्रमुख रूप से उगाई जाती है, जो कि सामान्यतः 2,300 मीटर (समुद्र तल से) की ऊंचाई तक उगाया जाता है। मंडुवे की खेती बहुत ही आसानी से कम लागत, बिना किसी भारीभरकम तकनीकी के ही सामान्य जलवायु तथा मिट्टी में आसानी से उग जाती है। मंडुवा C4 कैटेगरी का पौधा होने के कारण इसमें बहुत ही आसानी से प्रकाश संश्लेषण हो जाता है तथा दिनरात प्रकाष संश्लेषण कर सकता है। जिसके कारण इसमे चार कार्बन कंपाउंड बनने की वजह से ही मंडुवे का पौधा किसी भी विषम परिस्थिति में उत्पादन देने की क्षमता रखता है और इसी गुण के कारण इसे Climate Smart Crop का भी नाम भी दिया गया है। कई वैज्ञानिक अध्ययनो के अनुसार यह माना गया है की मंडुवा में गहरी जड़ों की वजह से सूखा सहन करने की क्षमता तथा विपरीत वातावरण, जहां वर्षा 300mm से भी कम पाई जाती है। वस्तुतः सभी Millets में Seed coat, embryo तथा Endosperm आटे के मुख्य अवयव होते है। जहां तक मंडुवा का वैज्ञानिक विश्लेषण है कि इसमें Multilayered seed coat (5 layers) पाया जाता है जो इसे अन्य Millet से Dietary Fiber की तुलना में सर्वश्रेष्ठ बनाता है। FAO के 1995 के अध्ययन के अनुसार मंडुवे में Starch Granules का आकार भी बड़ा (3से 21µm) पाया जाता है जो इसे Enzymatic digestion के लिए बेहतर बनाता है।

पोषक तत्वों से भरपूर मंडुवे में औसतन 329 किलो कैलोरी, 7.3 ग्राम प्रोटीन, 1.3 ग्राम फैट, 72.0 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 3.6 ग्राम फाइबर, 104 मि0ग्राम आयोडीन, 42 माइक्रो ग्राम कुल कैरोटीन पाया जाता है। इसके अलावा यह प्राकृतिक मिनरल का भी अच्छा स्रोत है। इसमें कैल्शियम 344Mg तथा फासफोरस 283 Mg प्रति 100 ग्राम में पाया जाता है। मंडुवे में Ca की मात्रा चावल और मक्की की अपेक्षा 40 गुना तथा गेहूं की अपेक्षा 10 गुना ज्यादा है। जिसकी वजह से यह हड्डियों को मजबूत करने में उपयोगी है। प्रोटीन , एमिनो एसिड, कार्बोहाइड्रेट तथा फीनोलिक्स की अच्छी मात्रा होने के कारण इसका उपयोग वजन करने से पाचन शक्ति बढाने में तथा एंटी एजिंग में भी किया जाता है।

मंडुवे का कम ग्लाइसिमिक इंडेक्स तथा ग्लूटोन के कारण टाइप-2 डायविटीज में भी अच्छा उपयोग माना जाता है जिससे कि यह रक्त में शुगर की मात्रा नही बढ़ने देता है।अत्यधिक न्यूट्रेटिव गुण होने के कारण मंडुवे की डिमांड विश्वस्तर पर लगातार बढ़ती जा रही है जैसे कि आज यूएसए, कनाडा, यूके, नॉर्वे, ऑस्ट्रेलिया, ओमान, कुवैत तथा जापान में इसकी बहुत डिमांड है। भारत के कुल निर्यात वर्ष 2004-2005 के आंकड़ों के अनुसार 58 प्रतिशत उत्पादन सिर्फ कर्नाटक में होता है। कर्नाटक मे लगभग 1,733 हजार टन जबकि उत्तराखंड में 190 हजार टन उत्पादन हुआ था जबकि 2008-2009 में भारत के कुल 1477 किलोग्राम हैक्टेयर औसत उत्पादन रहा। अनाज के साथ-साथ मंडुवे को पशुओ के चारे के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो लगभग 3 से 9 टन/हैक्टेयर की दर से मिल जाता है।

वर्ष 2004 में मंडुवे के बिस्किट बनाने तथा विधि को पेटेंट कराया गया था तथा 2011 में मंडुवे के रेडीमेड फूड प्रोडक्टस बनाने कि लिए पेटेन्ट किया गया था। दुनियाभर में मंडुवे का उपयोग मुख्य रूप से न्यूट्रेटिव डाइट प्रोडक्ट्स के लिए किया जाता है। एशिया तथा अफ़्रीकी देशो में मंडुवे को मुख्य भोजन के रूप में खूब इस्तेमाल किया जाता है जबकि अन्य विकसित देशो में भी इसकी मुख्य न्यूट्रेटिव गुणों के कारण अच्छी डिमांड है और खूब सारे फूड प्रोडक्टस जैसे कि न्यूडलस, बिस्किट्स, ब्रेड, पास्ता आदि मे मुख्य अवयव के रूप मे उपयोग किया जाता है। जापान द्वारा उत्तराखंड से अच्छी मात्रा में मंडुवे का आयात किया जाता है।

इंडिया मार्ट में मंडुवा 30 से 40 रू0 प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा है। 26 अगस्त 2013 के द टाइम्स ऑफ इण्डिया के अनुसार इण्डिया की सबसे सस्ती फसल (मंडुवा) इसके न्यूट्रिशनल गुणों के कारण अमेरिका में सबसे महंगी है। मंडुवा अमेरिका मे भारत से 500 गुना महंगा बिकता है। यूएसए में इसकी कीमत लगभग 10US डॉलर प्रति किलोग्राम है जो कि यहां 630 रुपये के बराबर है। जैविक मंडुवे का आटा बाजार में 150 किलोग्राम तक बेचा जाता है। भारत से कई देशो -अमेरीका, कनाडा , नार्वे, ऑस्ट्रेलिया, कुवैत, ओमान को मंडुवा निर्यात किया गया। केन्या में भी बाजरा तथा मक्का की अपेक्षा मंडुवे की कीमत लगभग दुगुनी है जबकि यूगाण्डा में कुल फसल उत्पादित क्षेत्रफल के आधें में केवल मंडुवे का ही उत्पादन किया जाता है। जबकि भारत में इसका महत्व निर्यात की बढती मांग को देखते हुए विगत 50 वर्षो से 50 प्रतिशत उत्पादन मे बढोतरी हुयी है जबकि नेपाल में मंडुवा उत्पादित क्षेत्रफल 8 प्रतिषत प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। चूँकि उत्तराखण्ड प्रदेश का अधिकतम खेती योग्य भूमी असिंचित है तथा मंडुवा असिंचित देशो मे उगाए जाने के लिये एक उपयुक्त फसल है जिसका राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पौष्टिक उत्पाद बनाने मे प्रयोग किया जाता है। मंडुवा प्रदेश की आर्थिकी का बेहतर स्रोत बन सकता है।( श्रोत- http://www.newslive24x7.com/mandua-himalayan-millets/न्यूज़ लाइव - 24x 7 ) .